बाल दिवस विशेष

thebiharnews-in-bihar-children-special
पटना के कुछ बच्चे एेेसे हैं जो छोटी उम्र में बड़े कारनामे दिखा रहे, जिसे देखकर लोग ‘वाह’ कहने को मजबूर हो जाते हैं। कोई तबला बजाने में माहिर है तो कोई ताइक्वांडो चैंपियन, जानिए…

कहते हैं, प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। राजधानी के कुछ बच्चे इस बात को सच करते दिखाई दे रहे। कोई 10 साल की उम्र में तबले पर करिश्मा दिखा रहा तो कोई 16 की उम्र में दूसरों के छक्के छुड़ा रहा। आप भी जानिए।

16 साल की उम्र में जीते 10 गोल्ड मेडल

बहादुरपुर की रहने वाली 16 साल की मुस्कान ताइक्वांडों में 10 गोल्ड मेडल जीत चुकी है। मुस्कान कहती है कि उसका सपना नेशनल खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाना है।

मुस्कान ने बीटीए स्टेट ताइक्वांडो, कला संस्कृति विभाग द्वारा अंतरप्रमंडलीय गेम, जिलास्तरीय 2016, पटना जिलास्तरीय ताइक्वांडो 2017, जिलास्तरीय इंटर स्कूल 2014 में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। इसके अलावा भी वह कई अन्य प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर चुकी है।

15 की उम्र में कहानियां लिखने में ‘प्रवीण’

सैदपुर के रहने वाले प्रवीण कुमार को कहानी लिखने का शौक है। वे विभिन्न अखबारों में आर्टिकल लिखते हैं। 15 साल के प्रवीण बताते हैं कि उन्हें कहानी लिखने का शौक नानी-दादी से सुने किस्से के बाद हुआ। लिखते-लिखते ना जाने कब ये शौक आदत में बदल गई।

अब तो कई बड़े कहानीकार के साथ प्रवीण स्टेज शेयर करते हैं। हाल ही में इंटरनेशनल चिल्डे्रन फिल्म फेस्टिवल में प्रवीण की बनाई फिल्म ‘एहसास’ का चयन हुआ है। प्रवीण अपनी कहानियों पर बॉलीवुड फिल्म बनने का सपना रखते हैं।

ये भी पढ़े : देश भर में गूंज रही बिहार के सीतामढ़ी की बांसुरी की धुन, नेपाल में भी डिमांड

वात्सल्य के तबले की थाप की गूंज

भूतनाथ रोड के रहने वाले वात्सल्य के तबले की थाप दूर-दराज से लोगों को खींच लाती है। मात्र 10 साल के वात्सल्य कई ख्याति प्राप्त शो का हिस्सा रह चुके हैं। वे बताते हैं कि स्कूल के समय से ही तबला बजाना पसंद है। अभी तो कई सारे शो का हिस्सा बन चुका हूं। परिजनों से भी पूरा सहयोग मिलता है। स्कूल और पढ़ाई से समय निकालकर तबले पर हाथ अजमाता हूं। वात्सल्य अभी जिला और राज्य स्तर पर कई सारे शो कर चुके हैं।

संवेदना दिखाने के लिए प्रिंस ने बना दी ‘द प्राइसलेस’

मां और बच्चे का प्रेम कैसा होता है। बच्चे कुछ गलती करते हैं तो मां किस प्रकार उसको सही दिशा में चलने को प्रेरित करती है। इसी को बताने के लिए 14 साल के प्रिंस ने ‘दि प्राइसलेस’ फिल्म बनाई है। इसका चयन इंटर नेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ है।

सैदपुर के रहने वाले प्रिंस बताते हैं कि उनका फिल्मों के प्रति रुझान काफी रहा। मां को उपहार देने से संबंधित फिल्म की कहानी मन में थी। फिल्म भी बनाई पर ये पता नहीं था कि ‘दि प्राइसलेस’ फिल्म फेस्टिवल में चयनित हो जाएगी।

ये भी पढ़े : पति की मौत के बाद मधुबनी पेंटिंग को बनाया सहारा, राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान