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ज़िन्दगी की एक शाम फिर तेरे नाम करते हैं

ज़िन्दगी की एक शाम फिर तेरे नाम करते हैं
हाँ, हम तुझसे अब भी प्यार करते हैं…

तेरी यादों में नींद नहीं आती रातों को,
सारी रात करवटें बदलते हैं…

तू आज आयी है फिर से पास मेरे मुझसे क्या पूछेगी…
क्या अपने ही दिए गए जख्मों की दास्ताँ मेरी जुबानी सुन सकेगी?

या फिर सुनेगी वही कवितायेँ जो कभी मैंने तेरे लिए लिखी थी…

लिखी थी की… जैसे दुल्हन के हाथों पर उसकी मेहँदी रंग छोड़ती है,
हमारा प्यार भी एक दूसरे के दिलों पे वैसे ही रंग छोड़ेगा।

तेरे प्यार में इतना पागल था उस वक़्त! कभी सोच न सका की तू भी खेल सकता है
मेरे जज़्बातों से और इस प्यार भरे दिल को तू भी औरो की तरह तोड़ेगा।

तन्हा कर गयी तू इस कदर की तन्हाई में हम अब भी सिसकियाँ भरते हैं!
तुझे याद कर के अकेले में छुप छुप के हम अब भी रोया करते है…

क्या शिकायत करूं तुझसे,
चलो आज एक बार फिर हम अपने प्यार को तेरे सामने साबित करते हैं।
तेरी सारी खताएं भूल कर तेरी माफ़ी मंजूर करते है।

आज फिर…
जिंदगी की एक शाम तेरे नाम करते हैं…
हाँ, हम तुझसे अब भी प्यार करते हैं…