दो हजार कर्मी बना रहे एक करोड़ 25 लाख पासपोर्ट

देश में 35 पासपोर्ट केन्द्र चल रहे हैं। यहां दो हजार अधिकारी और कर्मचारी मिलकर सालभर में एक करोड़ 25 लाख पासपोर्ट जारी करते हैं। पासपोर्ट की संख्या के अनुपात में कर्मचारियों और अधिकारियों की भारी कमी है। अगर जल्द से जल्द भर्ती नहीं होती है तो पासपोर्ट सेवा में दिक्कतें आने लगेंगी। ये बातें ऑल इंडिया पासपोर्ट स्टाफ एसोसिएशन के द्विवार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से आये पासपोर्ट कर्मचारियों और अधिकारियों ने कहीं। उनकी इस समस्या पर केन्द्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि पासपोर्ट सेवा काफी सुधरी है। पहले पासपोर्ट वेरिफिकेशन कराने के लिए लोग थाने का चक्कर काटते रहते थे। उन्होंने कहा कि अब लोगों के घर पर 15 दिनों में पासपोर्ट पहुंच जाता है। पासपोर्ट सेवा केन्द्र सरकार की ई-गर्वनेंस की सबसे सफल सेवा बनी है। लोगों को पासपोर्ट संबंधित समस्या का समाधान ट्विटर पर मिल रहा है। यह सब पासपोर्ट के कर्मचारियों की बदौलत संभव हुआ है। पासपोर्ट सेवा में कर्मचारियों की कमी, कैडर रिव्यू और प्रोन्नति को लेकर जल्द ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात करेंगे। ऑल इंडिया हज कमिटी के अध्यक्ष महबूब अली कैसर ने कहा कि वे डेढ़ साल से हज कमिटी के अध्यक्ष हैं। अब हज कमिटी अल्पसंख्यक मंत्रालय के अंतर्गत आ गया है। पहले हर साल हज यात्रा से पहले एडवाइजरी आती थी। इसमें कम से कम समय में हज संबंधित पासपोर्ट संबंधित समस्या निपटारे की बात कही जाती थी। इस साल नहीं आया है। हज का मामला बहुत ही संवेदनशील होता है। इसको लेकर केन्द्रीय मंत्री से जल्द बात करेंगे। एसोसिएशन के महासचिव अंतर्यामी राय ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पासपोर्ट सेवा को सरल और सुलभ बनाने के लिए प्रत्येक जिले के मुख्य डाकघर में पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोलने का निर्णय लिया है। बिहार में छह डाकघरों में खुल भी चुका है। लेकिन इन डाकघरों में न तो आवेदकों और पासपोर्ट कर्मचारियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजय कुमार वर्मा ने कहा कि विदेश मंत्रालय को ढाई साल से कैडर रिव्यू के लिए पत्र लिखा जा रहा है। इसके बाद भी अब तक लागू नहीं किया गया है। बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल, एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएच रिजवी, संगठन सचिव केवी बिमल, एफ ए अहमद, अशोक कुमार राय, शेखर कुमार, राम गोपाल बसाक और मदन चौधरी ने अपनी बातें रखी।