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Monday, January 22, 2018

साहित्य (literature) : कविताएँ, लघु कहानियाँ एवं आलेख का संग्रह

मुझे उड़ने दो !!

मुझे उड़ने दो !! उसका नाम कजरी था। वो उड़ती फिरती थी तितलियों की तरह।आम के बागों से लेकर छोटे से पोखर तक दौड़ती फिरती...

रंग सफ़ेद

उसके गोद में सर रख मैं लेटा था।। वो प्यार में मशगूल थी शायद ,उसकी उंगलियां मेरे बालो में हरकतें कर रही थी कुछ ।। और...

क्या मेरा वजूद, इतना ही है इस जहां में ?

क्या मेरा वजूद, इतना ही है इस जहां में? क्या लड़ नहीं सकती मैं? अपने अस्तित्व के लिए? या फिर पैदा ही हुई इस गुलिस्तां में_ अपने संसार...
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